नेपालसे एक चिट्ठा

Monday, May 30, 2005

माउन्ट एभरेस्टमें ट्राफिक जाम !

माउन्ट एभरेस्टमें ट्राफिक जाम !
सगरमाथा, जिसको आप लोग माउन्ट एभरेस्ट के नाम से अधिक पहचानते हैं, में आज ट्राफिक जामका माहौल रहा । आज मे ३० के दिन कूल ४६ लोग एभरेस्ट के शिखर चढाइ करने में सफल रहे ।
इस साल मौसम खराब होने कि वजह से कठिन माने जाने वाले नेपाल के दक्षिणी मोहोडा से एक भी पर्वतारोहीको एभरेस्ट चढाइ में सफलता नहीं मिली थी ।

इस साल नेपाली पर्वतारोहण क्षेत्रमें एक कीर्तिमान भी बना । आज सुबह ही स्थानीय एक महिला सुश्री मोनी मुलेपति भी सगरमाथा चढाइ करने में सफल रहे । मुलेपति राजधानी काठमाण्डु के आदिवासी नेवार समुदायकी महिला हैं । शेर्पा समुदाय के अलावा अ‍ौर समुदायकी महिला ने पहली बार इस तरह एभरेस्टकी चढाइ की है ।

Wednesday, May 25, 2005

हाथकी उंगलियाँ काटकर पूजा !

नेपाल में फेस्टिभल जिसको हम जात्रा कहते हैं, कि कमी नहीं है । हम लोग जीवित देवीका भी पूजा करते हैं अ‍ौर पिशाचों की भी । जीवित देवी कि कुमारी जात्रा यहाँ काठमाण्डू में हरेक वर्ष आयोजन होता है । उसी तरह खराब आत्मा असल आत्माका बिगार नकरें उस खातिर हरेक वर्ष हम पिशाच चतुर्दशीके दिन पिशाचों की भी पूजा करते हैं‍ । इस बारेमें मैं आपको अधिक जानकारी उसी दिन देने के कोसिस करता हुँ । बहरहाल इस चिट्ठे में मैं हाल ही हुए एक अनूठे जात्रा के बारे में बताने जा रहा हुँ । खुद नेपाल के लोगोंको भी इस जात्रा के बारे में कम ही जानकारी है ।
यहाँ एक स्थान है टिस्टुंग । वहाँ पर एक मन्दिर है बज्रवाराही । जाहिर है यह हिन्दू मन्दिर है अ‍ौर वाराहीका सम्बन्ध भगवती से है । इस मन्दिर में पहले तो मानव बली ही दी जाती थी । लेकिन आज की दौर में मानव बली उचित नहीं होती है । इसलिए मानव बलीका प्रचलन लोप हो गया । परन्तु मानव बलीकी प्रतिक के रुप में आजकल वहाँ मानव अंगूठे काटकर देवीको भोग देनेकी प्रचलन है । इस वर्ष मन्दिर के पूजारी ने स्वयं अपना अंगूठा काटकर भोग दिया था ।

अंगूठा ही नहीं, वहाँ हजारौं पशुपंक्षीयों का भी बलि दिया गया था । कभी कभी मै‍ सोचता हुँ नेपाल में इतनी बलि क्योँ दिया जाता है ? हिंसा हमारी संस्कृति में क्यों इस तरह फैला हुआ है ? हरेक वर्ष विजयादशमी के दो दिन पहले भी नेपाल भर के हिन्दू बली दिया करते है । उस रोज भी हजारौं पंक्षीका हत्या होता है । एक बार मेरे एक सात समुद्रपार के दोस्त नें मुझसे पूछा था, तुम लोगों की धर्म ए‍ेसा है तो पाप कैसा होगा ? शायद इसी वजह से नेपाल आज हिंसा-प्रतिहिंसा में फँसा हुआ है ।
मैं तो शाकाहारी हुँ । लेकिन मेरे घर में सभी मांसाहारी है । नेपाल में कोइ अपने आपको शाकाहारी कहे तो उसे अनूठे ढंग से देखा जाता है । आप लोगको सुनकर आश्चर्य होगा कि यहीं काठमाण्डू के पास ही गणेश वा गणपतिकी एक मन्दिर में भी बली दिया जाता है । वैसे तो बाँकी गणेशकी मन्दिरों में लड्डु ही चढाया जाता है, लेकिन इस मन्दिर में क्यों ए‍ेसा होता है ? इस मन्दिर के बारे में भी विस्तार में आपको किसी दिन बताने की कोशिश करेंगें ।
तो बात हो रही थी बज्रबाराही मन्दिर में बलियों की । बलि के अलावा वहाँ पशुअ‍ों की आहुती भी दिया गया था । सर्प से लेकर भैंस तक की सिरको वहाँ की गई होम में आहुती दिया गया था ।

Sunday, May 22, 2005

नेपाल में आज से जन आन्दोलन सुरु

मनीषा कोइराला के पिताको कारबाही

Courtesy: NPA
नेपाल के सात प्रमुख पार्टीयोंकी संयुक्त मोर्चा ने आज से जन आन्दोलन सुरु की है । आज आयोजित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में राजदरबारसे १० मिनेट की दूरी में अवस्थित शहरका एक मुख्य चोक असन में १० हजार से भी अधिक लोगों ने हिस्सा लिया । फेब्रुअरी १ में राजा ने शासन सत्ता अपने हाथों मे लेकर प्रत्यक्ष शासन व इमर्जेन्सी लागू किया था । उसके बाद से आज ये सबसे बडा विरोध प्रदर्शन है ।
सरकार ने कल ही एक सूचना जारी करके जुलुसको संयमित होने अ‍ौर राजा के विरोध में नाराबाजी नकरने की चेतावनी दिया था । मगर आज जुलुस में राजा के विरोध में भी नारा लगाया गया था ।
विरोध प्रदर्शन स्थल निकट बडे संख्या में दंगा प्रहरी तैनाथ किया गया था । मगर उन्होनें हस्तक्षेप नहीं की । विपक्षी पार्टीयों ने अब भंग कि गई संसदको पुनर्स्थापन करने की माग की है । उनके अनुसार उसके बाद संसद ही माअ‍ोवादीयों से वार्ता कर संविधान सभा तक की विकल्प में जाएगा ।
इसी दौरान नेपाल के एक प्रमुख पार्टी नेपाली कांग्रेस नें बलिउड हिरोइन मनीषा कोइराला के पिता प्रकाश कोइरालाको साधारण सदस्यता से भी निश्काषित किया है । प्रकाश कोइराला व मनीषा कोइराला ने राजा के कदम के समर्थन में सार्वजनिक अभिव्यक्ति दिए थे । प्रकाश ने प्रजातन्त्र पुनर्स्थापना के लिए जारी आन्दोलनको अ‍ौचित्यहीन कहते हुए सरकारी मुखपत्र गोरखापत्र में अन्तर्वार्ता दिया था ।

Saturday, May 21, 2005

भारतीयोंका अंग्रेजी मोह !

उच्च शिक्षा के लिए कई नेपाली छात्र भारत जाया करते हैं । लेकिन आज नेपाली दैनिक कान्तिपुर में उससे ठीक विपरीत नेपाली विद्यालयों में भारतीय छात्रोंका चाप के सम्बन्ध में एक समाचार छपा है ।
समाचार के मुताबिक भारतका महाराजगञ्ज जिलाके विभिन्न गावंसे गुणस्तरीय व निःशुल्क शिक्षाके लिए नेपाल आनेका प्रचलन बढा है । सीमा क्षेत्र भुजवहामें अवस्थित एक विद्यालय जनता माध्यमिक विद्यालय में इस वर्ष अकेले ही ५० से अधिक भारतीय छात्र भर्ती हुए है ।
७ वर्षका पुत्र सकुनको नेपाली विद्यालय में भर्ती करने के लिए आए लक्ष्मीपुरके ऋषिकेश श्रीवास्तव नें पत्रिकासे कहा है, यहाँ के भारतीय नागरिक अपने सन्तानोंको जहाँ तक संभव हो नेपाले में ही पढाना चाहते हैं । भारतीय गावं के विद्यालयों में कक्षा ६ से अंग्रेजी सिखाया जाता है जबकि नेपालके सरकारी विद्यालयों मे १ कक्षा से ही अंग्रेजी पढाया जाता है । हम लोग अपने सन्तानों को अंग्रेजी पढाना चाहते हैं । इसलिए यहाँ आए हैं ।
श्रीवास्तव ने अपने दो पुत्रोंको यहीं के स्कूल से प्राइमरी उत्तीर्ण करवाया था । जनता मावि के प्रधानाध्यापक रामकमल सहनी के अनुसार भारत घर बताने से भर्ती न हो पाने की खतराको देखते हुए वे लोग नेपाली परिचितोंकी सहायता इसमे लेते है ।

Friday, May 20, 2005


Dharhara,KTM Posted by Hello

नेपालका अपना 'मिसाइल'

ये काठमाण्डु में अवस्थित धरहराका चित्र है । जब जब हमारे पडोसी मुल्क मिसाइलें टेस्ट करते है, तब हम लोग भी जोक में इसीको अपना मिसाइल के रुप में देखते हैं । गाइजात्रा के पत्रिकाअ‍ों ने इसकी सुरुवात की थी । आप लोगोंको बता दें कि जैसे भारत में होली के दिन पत्रपत्रिकाअ‍ों में हास्यव्यङ्ग्य कि विशेष अंक निकलते हैं, ठीक उसी तरह नेपाल में गाइजात्रा के दिन अंक निकलते हैं । एक बार वैसी ही एक पत्रिका में कुछ वर्ष पहले धरहराको मिसाइलका रुप दिया गया था । उसी समय से आज तक धरहराको मिसाइल कहकर लोग मजाक किया करते है ।
धरहराको भीमसेन स्तम्भ भी कहा जाता है । प्रधानमन्त्री भीमसेन थापा ने इसका निर्माण करवाया था । पहले धरहरा १२ तले की थी । लेकिन विक्रम संवत १९९० मा महाभूकम्प मे टुटने कि वजह से आज मात्र ९ तले कि है ।
कुछ अर्से पहले तक यहाँ किसीको जाने या चढ्ने नहीं दिया जाता था । लेकिन अब ५० रुपये कि टिकट काटकर यहाँ चढाइ की जा सकती है । यहाँ के वरण्डा से काठमाण्डुका नजारा बहुत अच्छे ढंग से दिखाइ देती है ।

धन्यवाद आप सभी को

मेरा चिट्ठा देखकर उसमे अपनी प्रतिक्रिया लिखने के लिए सभीको आभार । व्याकरण कि टिप्स के लिए ईस्वामी जीको धन्यवाद । आपसे इसी तरह की टिप्स की उम्मिद मैं लगातार करता रहुँगा । यहाँ मैं बता दुँ कि हिन्दी मे मैनें कभी अ‍ौपचारिक शिक्षा नहीं ली है । उसी कारण गल्ती तो होगी ही । गल्ती सुधारने की मकसद से ही मैंने ब्लग लिखना सुरु किया है ।

Friday, May 13, 2005

देखिए पशुपतिका नजरिया



ये पशुपतिनाथ मन्दिर परिसर कि तस्वीर है । वैसे आप में से बहुतों को पता होगा जो नेपाल में आये हैं कि पशुपति परिसर में क्यामेरा अलाउड नहीं है । पर हम लोग पत्रकार जो ठहरे, कुछ उपाय तो कर ही लेते हैं । ये तस्वीर मैने नेपाली नव वर्ष के दौरान लिए थे । यानि कि एक महिने पहले । उस दिन मन्दिर में बहुत भीड था ।
आप लोगों को जानकारी तो होगी ही कि पशुपतिका चार द्वार चाँदी से बनी हुइ है । अ‍ौर जो छत है, उसे सोने से रंगाया गया है ।
पशुपति में एक भारतीय मूल पुजारी होता है । बाँकी उसके सहायक नेपाली होते हैं ।
उनको भण्डारी कहा जाता है । पशुपति में बहुत चन्दा इकट्ठा होता है । मगर उसका कोइ
हिसाब नहीं होता है । सब के सब पुजारी व भण्डारी लोग खा जाते है ।
दिखाने के लिए वैसे कुछ हिसाब दिखाइ जाती है । मगर उसपे कोइ विश्वास नहीं करते । हाल ही के दिनो में पशुपति में हो रही भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा है । मगर राजा ने शासन अपनी हातों मे लेते हुए सीधे नेता लोगों के उपर भ्रष्टाचारकी कारबाही आगे बढाया है । उसकारण ये मामला ठोडा ठण्डा पडा हुआ है ।

मैं आया…..आपके लिए

हिन्दी में बहुत सारे चिट्ठे देख लिए । सो सोचा क्युँ न मैं भी ट्राइ मार लुँ । वैसे माफ करेँ, हिन्दी मुझे उतनी आती नहीँ । मैं काठमाण्डु नेपाल से हुँ । नेपाल के लोग थोडे बहुत हिन्दी जान लेते हैं । मैं भी उन्हीं में से हुँ । सो व्याकरण कि कोइ गल्ती हो जाए तो मुझे सुधारिएगा ।
हिन्दी कि पहुँच बडा है । इसलिए मैं हिन्दी में भी ब्लग कर रहा हुँ । वैसे मैं नेपाली में नियमित रुप से ब्लग कर रहा हुँ । अंग्रेजी में भी ब्लग कर रहा हुँ पर नियमित नहीं हो पा रहा । एक अ‍ौर भाषा नेपालभाषा जिसे नेवारी भाषा भी कहा जाता है, उसमें भी ब्लग करने कि सोच रहा हुँ । हिन्दी चिट्ठा मूलतः नेपाल के विषय में ही होगा । एक नेपालीकी नजरिया से विश्वको देखने के लिए मेरा चिट्ठा उपयोगी होगा ।
उद्‍घाटन भाषण तो कर दिया लेकिन पता नहीं पाठक है कि नहीं । इससे भी महत्त्व कि बात तो नियमितता कि होगी । महिने में दो चार चिट्ठे तो कर ही लुँगा, यही सोचा है । देखेँ आप लोगों से कितनी सहायता मिलेगी मुझे । मुझे हिन्दी सिखना है, आप सिखाअ‍ोगे ना ?